पंचायतीराज और निकाय चुनाव से पहले राजस्थान में सियासी हलचल, अनुसूचित जाति वोट बैंक पर बीजेपी की नजर
राजस्थान में आगामी पंचायतीराज और निकाय चुनावों की तारीखों का भले ही अभी औपचारिक ऐलान नहीं हुआ हो, लेकिन सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस चुनावी रणनीति बनाने में जुट गई हैं। इसी कड़ी में भाजपा ने अनुसूचित जाति वर्ग को साधने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसे चुनावी दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
अनुसूचित जाति वोट बैंक की अहम भूमिका
राजस्थान की राजनीति में अनुसूचित जाति वर्ग की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल आबादी में इस वर्ग की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है, जो संख्या के लिहाज से करीब 1.20 करोड़ के आसपास बैठती है। वर्तमान समय में यह आंकड़ा और बढ़ने का अनुमान है।
इसी कारण विधानसभा, लोकसभा, पंचायतीराज और निकाय चुनावों में यह वर्ग राजनीतिक दलों की प्राथमिकता में रहता है। परंपरागत रूप से यह वोट बैंक कांग्रेस के साथ जुड़ा माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई प्रयास किए हैं।
अंबेडकर जयंती के जरिए सियासी रणनीति
भाजपा ने अनुसूचित जाति समाज तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए भीमराव अंबेडकर जयंती को केंद्र में रखते हुए विशेष अभियान की रूपरेखा बनाई है। 14 अप्रैल को मनाई जाने वाली अंबेडकर जयंती को इस बार पार्टी बड़े स्तर पर ‘उत्सव’ के रूप में मनाने जा रही है।
पार्टी की योजना के अनुसार, पूरे प्रदेश में सात दिन तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में विचार गोष्ठियां, संवाद कार्यक्रम, रैलियां और सामाजिक जागरूकता अभियान शामिल होंगे। इसके माध्यम से भाजपा दलित समाज के बीच अपनी विचारधारा और योजनाओं को पहुंचाने का प्रयास करेगी।
कांग्रेस पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने अनुसूचित जाति समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है और उनके विकास की उपेक्षा की है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा बाबा साहब अंबेडकर को सम्मान देने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहब से जुड़े स्थलों को ‘पंच तीर्थ’ के रूप में विकसित किया गया है और संविधान दिवस मनाने जैसी पहलें भी की गई हैं।
राठौड़ ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने अंबेडकर को उचित स्थान नहीं दिया और उन्हें राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने में असफल रही।
गांव-गांव तक पहुंचेगा अभियान
इस अभियान के संयोजक और प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव और वार्ड-वार्ड जाकर अंबेडकर के विचारों और संविधान में उनके योगदान को लोगों तक पहुंचाएंगे।
दलित बस्तियों में विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां समाज के लोगों से सीधे संपर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़कर पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।
संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव
भाजपा की रणनीति केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव किए जा रहे हैं। दलित समाज से जुड़े कार्यकर्ताओं को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, ताकि वे अपने समुदाय में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
इसके साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ इस वर्ग तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे पार्टी के प्रति विश्वास बढ़ाया जा सके।
चुनावी मोड में भाजपा
भाजपा खुद को हमेशा चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी बताती है और इसी रणनीति के तहत वह कोई भी अवसर छोड़ना नहीं चाहती। अनुसूचित जाति वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए अंबेडकर जयंती को एक मजबूत माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।
आगामी चुनावों से पहले यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की यह रणनीति कितना असर दिखाती है और क्या वह कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में अपनी जगह बना पाती है या नहीं।