नेपाल में बालेन शाह के ताबड़तोड़ फैसले, पूर्व पीएम ओली की गिरफ्तारी से लेकर भ्रष्टाचार पर बड़ा अभियान शुरू
नेपाल की राजनीति में इन दिनों भारी हलचल देखने को मिल रही है। नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह ने लगातार सख्त और बड़े फैसले लेकर पूरे राजनीतिक तंत्र को झकझोर दिया है। सरकार बनने के तुरंत बाद उन्होंने जहां पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी कराकर कड़ा संदेश दिया, वहीं अब तीन दशक के नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की जांच का आदेश देकर भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है।
पूर्व प्रधानमंत्री ओली की गिरफ्तारी से मचा राजनीतिक तूफान
नेपाल सरकार के सबसे बड़े और चर्चित फैसलों में से एक पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी रही। उनके साथ पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया।
यह कार्रवाई पिछले वर्ष सितंबर में हुए जन-आंदोलन से जुड़े मामलों में की गई है। उस आंदोलन में हुई हिंसा और कुछ लोगों की मौत के आरोपों के आधार पर यह कदम उठाया गया। इस गिरफ्तारी के बाद राजधानी काठमांडू समेत कई क्षेत्रों में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
ओली की पार्टी के समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया, टायर जलाए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें भी सामने आईं, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
सरकार का दावा—कानून के तहत हो रही कार्रवाई
जहां विपक्षी दल इस गिरफ्तारी को “बदले की राजनीति” बता रहे हैं, वहीं सरकार ने इसे पूरी तरह कानून के दायरे में उठाया गया कदम बताया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही बड़ा नेता क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा नहीं, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
100 बिंदुओं वाला सुशासन एजेंडा जारी
गिरफ्तारी के साथ ही सरकार ने सुशासन को लेकर 100 बिंदुओं वाला एक व्यापक एजेंडा भी जारी किया है। इस एजेंडा में साफ कहा गया है कि वर्ष 1990 से 2026 तक सार्वजनिक पदों पर रहे सभी नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की जांच की जाएगी।
इसके लिए अगले 15 दिनों के भीतर एक शक्तिशाली समिति गठित की जाएगी, जो इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से दशकों से चले आ रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सकेगी।
तीन दशकों की संपत्तियों की होगी जांच
सरकार की योजना के अनुसार इस अभियान को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में 2006 से 2026 तक के नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की जांच की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में 1990 से 2005 के बीच के कार्यकाल की भी जांच की जाएगी।
इस फैसले को नेपाल के इतिहास में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़े कदमों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि इससे बड़े स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही तय हो सकती है।
डिजिटल एसेट रजिस्ट्री से बढ़ेगी पारदर्शिता
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार ने नेपाल राष्ट्र बैंक को 100 दिनों के भीतर डिजिटल एसेट रजिस्ट्री तैयार करने का निर्देश दिया है।
इस रजिस्ट्री में बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, शेयर निवेश और अन्य वित्तीय गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके अलावा एक ऐसी आधुनिक प्रणाली भी विकसित की जाएगी, जो संदिग्ध लेन-देन की पहचान कर स्वतः जांच एजेंसियों को अलर्ट भेज सकेगी।
जनता की उम्मीदें और राजनीतिक चुनौती
नेपाल में लंबे समय से भ्रष्टाचार को लेकर जनता में असंतोष रहा है। खासकर हालिया जन-आंदोलनों में यह मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया था। ऐसे में बालेन शाह के ये फैसले आम जनता के बीच उम्मीद जगाने वाले माने जा रहे हैं।
हालांकि, इन सख्त कदमों के कारण राजनीतिक विरोध भी तेज हो गया है और आने वाले समय में सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।