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सोशल मीडिया रील्स और लेट नाइट स्क्रीन: कैसे बिगड़ रही है Gen Z की नींद और बढ़ रहा बीमारियों का खतरा

आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया युवाओं की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। खासकर Gen Z यानी नई पीढ़ी का बड़ा समय मोबाइल स्क्रीन पर बीतता है। देर रात तक रील्स देखना, लगातार स्क्रॉल करना और डिजिटल कंटेंट में डूबे रहना अब एक आम आदत बन गई है। लेकिन यही आदत धीरे-धीरे उनकी नींद की गुणवत्ता को खराब कर रही है, जिसका असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ रहा है।

नींद के पैटर्न पर गहरा असर

देर रात तक मोबाइल चलाने से शरीर की प्राकृतिक नींद चक्र यानी स्लीप साइकिल प्रभावित होती है। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को कम कर देती है। यह हार्मोन नींद लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब इसका स्तर कम होता है, तो व्यक्ति को नींद आने में दिक्कत होती है और नींद गहरी नहीं हो पाती।

मेंटल हेल्थ पर पड़ता है असर

लगातार कंटेंट देखने से दिमाग सक्रिय बना रहता है और उसे आराम करने का मौका नहीं मिलता। इससे मानसिक थकान बढ़ती है। नींद पूरी न होने के कारण चिड़चिड़ापन, तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो व्यक्ति की मानसिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

स्ट्रोक और हृदय रोग का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, खराब नींद का असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता। यह हृदय स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। लगातार नींद की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे आगे चलकर स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

याददाश्त और सीखने की क्षमता में गिरावट

जब शरीर को पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो इसका असर दिमाग की कार्यक्षमता पर पड़ता है। याददाश्त कमजोर होने लगती है और नई चीजें सीखने की क्षमता घट जाती है। छात्रों और युवाओं के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि इससे उनके करियर और प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।

तनाव और हार्मोनल असंतुलन

लेट नाइट स्क्रॉलिंग के दौरान व्यक्ति कई तरह के कंटेंट देखता है, जैसे दुखद खबरें, बहस या ग्लैमरस जीवनशैली। इससे दिमाग लगातार अलर्ट मोड में रहता है और शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन तनाव बढ़ाता है और नींद की गुणवत्ता को और खराब करता है। इसके साथ ही मेलाटोनिन का असंतुलन शरीर की इम्यूनिटी को भी कमजोर कर देता है।

स्क्रीन टाइम कम करने के उपाय

इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे पहले, सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइस से दूरी बना लें। इसके बजाय किताब पढ़ने या हल्का संगीत सुनने जैसी आदतें अपनाएं, जो दिमाग को शांत करने में मदद करती हैं। इसके अलावा, सोने और संतुलित बनी रहे।