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रामनवमी पर अयोध्या में रामलला का दिव्य सूर्य तिलक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किए लाइव दर्शन

देशभर में रामनवमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया, लेकिन इस बार अयोध्या राम मंदिर में आयोजित कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिर में भव्य अनुष्ठान किए गए, जिनमें सबसे प्रमुख रहा रामलला का सूर्य तिलक। इस दिव्य क्षण को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे।

मध्याह्न में हुआ भगवान राम का जन्मोत्सव

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम का जन्म मध्याह्न में हुआ था। इसी परंपरा का पालन करते हुए ठीक दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया गया। इससे पहले भगवान का विधिवत अभिषेक किया गया और उन्हें पीतांबर पहनाकर विशेष श्रृंगार किया गया।

इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर के साक्षी बनकर खुद को धन्य महसूस किया।

प्रधानमंत्री ने किए लाइव दर्शन

इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नई दिल्ली स्थित अपने कार्यालय से रामलला के दर्शन किए। उन्होंने लाइव प्रसारण के माध्यम से इस दिव्य सूर्य तिलक को देखा और देशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री का यह कदम इस आयोजन की राष्ट्रीय महत्ता को दर्शाता है और इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और जुड़ाव भी मजबूत हुआ।

शुभ योग में हुआ आयोजन

इस वर्ष 27 मार्च 2026, शुक्रवार को रामनवमी के दिन विशेष खगोलीय संयोग भी बना। इस दिन रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ मेल रहा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इन योगों में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है।

इसी कारण इस बार का सूर्य तिलक और भी अधिक पवित्र और फलदायी माना जा रहा है।

सूर्यवंश से भगवान राम का संबंध

भगवान राम को सूर्यवंशी कहा जाता है, जिसका संबंध सीधे सूर्य देव से है। पौराणिक कथाओं के अनुसार उनका जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ था, जिसकी स्थापना सूर्य देव के पुत्र राजा इक्ष्वाकु ने की थी। यही कारण है कि इस वंश को सूर्यवंश कहा जाता है।

इस वंश में राजा हरिश्चंद्र, राजा सगर, राजा भगीरथ, राजा दिलीप और राजा रघु जैसे महान राजा हुए, जिन्होंने धर्म और सत्य की परंपरा को आगे बढ़ाया।

12 कलाओं से पूर्ण माने जाते हैं राम

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सूर्यवंश में 12 कलाओं का विशेष महत्व है और भगवान राम को इन 12 कलाओं से पूर्ण अवतार माना जाता है। इन कलाओं में मित्र, रवि, सविता, भानु आदि का उल्लेख मिलता है।

इसके साथ ही भगवान राम में 16 विशिष्ट गुण भी बताए गए हैं, जैसे सत्यवादिता, धर्मज्ञान, संयम, शांति और बुद्धिमत्ता। उनके चरणों में 48 दिव्य चिह्न होने का भी वर्णन मिलता है, जो उनकी दिव्यता को दर्शाते हैं।

वैज्ञानिक तकनीक से हुआ सूर्य तिलक

रामलला का सूर्य तिलक पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर किया गया। इसके लिए मंदिर के ऊपरी हिस्से में विशेष रिफ्लेक्टर, लेंस और दर्पणों की व्यवस्था की गई थी। सूर्य की किरणें इन लेंसों के माध्यम से परावर्तित होकर सीधे रामलला के ललाट पर पड़ीं।

करीब 75 मिलीमीटर के आकार में बना यह तिलक कुछ मिनटों तक दिखाई दिया, जिसने श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया। इस प्रक्रिया की सफलता सुनिश्चित करने के लिए 24 मार्च को इसका पूर्व परीक्षण भी किया गया था।