होर्मुज में पाकिस्तान को झटका, ईरान ने रोका जहाज
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच खुद को शांतिदूत के रूप में पेश कर रहे पाकिस्तान को ईरान ने बड़ा झटका दिया है। कराची की ओर जा रहे एक मालवाहक जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी गई और उसे बीच रास्ते से ही वापस लौटा दिया गया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की कोशिशों में लगा हुआ है।
यूएई से आ रहा था खाद्य सामग्री का जहाज
SELEN नामक यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह से खाद्य सामग्री लेकर पाकिस्तान के कराची बंदरगाह की ओर जा रहा था। जहाज पर सेंट किट्स और नेविस का झंडा लगा हुआ था। फारस की खाड़ी से होते हुए यह जहाज जब होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने लगा, तभी ईरानी सुरक्षा बलों ने उसे रोक लिया।
कानूनी अनुमति न होने पर की कार्रवाई
ईरान की इस कार्रवाई के पीछे स्पष्ट कारण भी सामने आया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी ने बताया कि जहाज ने आवश्यक कानूनी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया था। उसके पास होर्मुज से गुजरने की जरूरी अनुमति और दस्तावेज नहीं थे। उन्होंने साफ कहा कि ईरान की समुद्री अथॉरिटी की मंजूरी के बिना कोई भी जहाज इस मार्ग से नहीं गुजर सकता।
होर्मुज पर बढ़ी सख्ती और वैश्विक असर
अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर निगरानी और नियंत्रण कड़ा कर दिया है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ईरान ने हालांकि यह स्पष्ट किया है कि वह केवल अपने विरोधी देशों और उनके समर्थकों के जहाजों पर ही सख्ती बरत रहा है।
मध्यस्थता की कोशिशों पर असर
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पाकिस्तान और ईरान के बीच पारंपरिक रूप से अच्छे संबंध रहे हैं। पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में वार्ता की मेजबानी की पेशकश भी की है, लेकिन दोनों पक्षों की कड़ी शर्तों के चलते समाधान की राह आसान नहीं दिख रही।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर बढ़ा दबाव
होर्मुज मार्ग पर पाबंदियों के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। पहले से ही ईंधन संकट और क्षेत्रीय संघर्षों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।