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राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026 : तकनीकी विकास की नई दिशा

राजस्थान सरकार ने प्रदेश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026’ जारी की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में लाई गई इस नीति का उद्देश्य राज्य में निवेश बढ़ाना, रोजगार के अवसर पैदा करना और तकनीकी विकास को गति देना है। आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर उद्योग की अहम भूमिका को देखते हुए यह नीति प्रदेश के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष प्रावधान

इस नीति के तहत सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े प्रोजेक्ट्स को कई प्रकार की आर्थिक रियायतें दी जाएंगी। प्रमुख रूप से 7 वर्षों तक बिजली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा स्टाम्प शुल्क और भू-रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी, जबकि 25 प्रतिशत तक पुनर्भरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

साथ ही, केंद्र सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत स्वीकृत पूंजी सब्सिडी का 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। निवेश को और बढ़ावा देने के लिए टर्म लोन पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। इन प्रावधानों से राज्य में बड़े निवेशकों को आकर्षित करने की संभावना बढ़ेगी।

रोजगार और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

सेमीकंडक्टर उद्योग इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल, रक्षा और डिजिटल क्षेत्र की रीढ़ माना जाता है। इस नीति के लागू होने से इन क्षेत्रों में तेजी से विकास होगा और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

इसके साथ ही, युवाओं के लिए कौशल विकास के नए अवसर भी तैयार होंगे। उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों के माध्यम से राज्य के युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीकी दक्षता हासिल करने का मौका मिलेगा।

सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का विकास

राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को कवर करती है। इसमें अनुसंधान, डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और पैकेजिंग जैसे सभी चरण शामिल किए गए हैं।

राज्य में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के लिए जोधपुर, पाली और मारवाड़ क्षेत्र को विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। कांकणी औद्योगिक क्षेत्र सहित कई क्लस्टर्स को सेमीकंडक्टर कॉरिडोर के रूप में तैयार किया जाएगा। यहां उद्योगों को भूमि, बिजली, पानी, सड़क और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

पर्यावरण संतुलन पर भी जोर

औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी इस नीति में प्राथमिकता दी गई है। पात्र उद्योगों को पर्यावरणीय परियोजनाओं की लागत का 50 प्रतिशत तक पुनर्भरण मिलेगा।

इसके अलावा, कैप्टिव रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग करने वाले प्रोजेक्ट्स को 7 वर्षों तक बिजली शुल्क में पूरी छूट दी जाएगी। राजस्थान ग्रीन रेटिंग सिस्टम के तहत सहमति शुल्क में भी 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी, जिससे उद्योगों को पर्यावरण के अनुकूल तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

केंद्र की योजनाओं का मिलेगा लाभ

राजस्थान की यह नीति केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ तालमेल में तैयार की गई है। मेक इन इंडिया, सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव जैसी योजनाओं का लाभ भी निवेशकों को मिलेगा।

केंद्र सरकार द्वारा इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत 40 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान से भी इस क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। इससे राजस्थान को देश के प्रमुख तकनीकी राज्यों की श्रेणी में शामिल होने का अवसर मिलेगा।