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किसानों पर नहीं पड़ेगा जंग का असर, खाद संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भरोसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने भारत के सामने भी कई अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यह चुनौतियां केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानवीय दृष्टि से भी गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में यह संघर्ष हो रहा है, वह दुनिया के कच्चे तेल और गैस का बड़ा स्रोत है, इसलिए इसका असर वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है।

भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि संकट की इस घड़ी में विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। केवल ईरान से ही करीब 1000 भारतीयों की सुरक्षित वापसी कराई गई है, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित देशों में स्थित भारतीय मिशन लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं और घायल लोगों के इलाज की भी पूरी व्यवस्था की जा रही है।

ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के प्रयास

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युद्ध के कारण होर्मुज जलमार्ग से आने वाली ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, लेकिन सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में अपनी ऊर्जा आयात प्रणाली को मजबूत और विविध बनाया है। पहले जहां देश 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है। इसके अलावा देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है और इसे और बढ़ाने पर काम चल रहा है।

खाद और खेती पर असर नहीं पड़ने का भरोसा

प्रधानमंत्री ने किसानों की चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में जंग का असर खेती और खाद की उपलब्धता पर नहीं पड़ने देगी। उन्होंने कहा कि देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार है और खरीफ सीजन के लिए भी पूरी तैयारी की जा रही है। सरकार ने बीते वर्षों में खाद का पर्याप्त स्टॉक तैयार किया है, जिससे किसानों को समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कोरोना काल में जब वैश्विक स्तर पर यूरिया की कीमतें 3000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई थीं, तब भी भारतीय किसानों को यह 300 रुपये से कम कीमत पर उपलब्ध कराया गया था। यह सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

शिक्षा और अन्य सेवाओं पर भी ध्यान

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए कदम उठाए गए हैं। सीबीएसई ने प्रभावित क्षेत्रों के भारतीय स्कूलों में कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और छात्रों के हित में वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार हर क्षेत्र में संवेदनशीलता और सतर्कता के साथ काम कर रही है।

कूटनीति के जरिए समाधान की पहल

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उन्होंने स्वयं पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बातचीत की है और सभी से तनाव कम करने तथा संघर्ष समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति और मानवता के पक्ष में खड़ा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों और व्यापारिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताया और कहा कि भारत अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

देशवासियों को सतर्क रहने की अपील

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि ऐसे संकट के समय कुछ लोग अफवाहें फैलाने और स्थिति का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। कोस्टल सिक्योरिटी, बॉर्डर सिक्योरिटी, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने राज्य सरकारों से भी अपील की कि कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त नजर रखी जाए, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

सरकार का समन्वित प्रयास जारी

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस स्थिति से निपटने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें लगातार की जा रही हैं और मंत्रियों तथा अधिकारियों का एक समूह बनाया गया है, जो सभी पहलुओं पर नजर रखे हुए है। सरकार का प्रयास है कि इस वैश्विक संकट का असर देश के नागरिकों और किसानों पर न्यूनतम रहे।